खेल दिवस विशेष : जहां कभी हॉकी का ककहरा सीखते थे ओलम्पियन मोहम्मद शाहिद, आज वहां बन गया कार्यालय

साथ में संवाददाता ध्यानचंद शर्मा 

वाराणसी। हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद शर्मा की जयंती आज पूरे देश में राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनायी जा रही है। प्रधानमंत्री ने लाइव प्रसारण के ज़रिये पूरे देश को ‘फिटनेस शपथ’ दिलवाई। प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में भी छात्रों ने स्पोर्ट्स को लेकर आज विविध आयोजन किये पर कभी हॉकी की नर्सरी कहा जाने वाला शहर का वरुणापार ज़ोन आज शासन की रुसवाई से राष्ट्रीय खेल हॉकी की स्टिक को छोड़ अन्य खेलों का रुख कर रहा है।

वरुणापार में जहां कभी हॉकी के बड़े ग्राउंड हुआ करते थे आज वहां कार्यालय हैं, जो स्टेडियम हैं भी वो दूर बने हैं जिसकी वजह से आने वाली पीढ़ी इस खेल से दूर हो रही है।

राष्ट्रीय खिलाड़ी ने बताया हॉकी का दर्द
राष्ट्रीय खेल दिवस पर हमने बात की पद्मश्री मोहम्मद शाहिद के साथ हॉकी का ककहरा सीखने वाले नेशनल हॉकी प्लेयर अनिल शर्मा से। अनिल शर्मा इस समय एसबीआई बैंक में कार्यरत हैं। बैंक से खाली होने के बाद उन्होंने हमें समय दिया। अनिल शर्मा ने अपनी चिरपरिचित हंसी के साथ कहा कि हॉकी के भगवान कहूं तो कम नहीं होगा उनके जैसा खिलाड़ी शायद अब कभी न हो।

ख़त्म हो गए ग्राउंड
अनिल शर्मा ने बताया कि बनारस में हॉकी के खिलाड़ियों की कमी नहीं है पर यहां ग्राउंड की कमी ने इस खेल को ख़त्म होने के कगार पर खड़ा कर दिया है। पहले यहां बहुत बड़े और अच्छे ग्राउंड होते थे, जिसमे पुलिस लाइन का वृहद् मैदान जहां हमेशा स्टेट लेवल की हॉकी प्रतियोगिताएं होती थी और हॉकी के शौकीनों का हुजूम इस ग्राउंड में अपने मनपसंद प्लेयर को देखने और उनकी हौसलाअफ़ज़ाई करने के लिए उमड़ता था। इस ग्राउंड अब सिर्फ ड्रिल होती है या बच्चे क्रिकेट खेलते नज़र आते हैं। हॉकी इस ग्राउंड से विदा हो चुकी है।

इन मैदानों पर आते थे मशहूर हॉकी प्लेयर
इसके अलावा अनिल ने बताया कि कमिश्नरी का ग्राउंड जहां आज पेड़ -पौधा लगा दिया गया है और आज का वीडीए कार्यालय जो पहले पन्नालाल पार्क हुआ करता था उसमे हॉकी के बड़े स्तर के टूर्नामेंट हुआ करते थे।

एक मैदान की आस
अनिल शर्मा ने शासन से मांग की कि हॉकी प्लेयर चाहते हैं कि पद्मश्री मोहम्मद शहीद के नाम से एक एकेडमी और एक मैदान दिया जाए ताकि हॉकीकी नर्सरी फिर से उसमे पौधे लगा सके। अनिल ने बताया कि ओलम्पियन विवेक सिंह स्टेडियम, यूपी कालेज का मैदान और बड़ा लालपुर के जीवन दीप पब्लिक स्कूल का एस्ट्रोटर्फ काफी दूर है। यहां खिलाड़ी खेलने तो जा सकते हैं पर नयी पीढ़ी ये गेम देखने वहां नहीं जाएगी। पूर्व के मैदानों में लोग पैदल जाया करते थे। इसलिए वरुणापार में एक हॉकी का मैदान चाहिए।

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