वाराणसी। प्रधानमंत्री जब जुलाई में वाराणसी आये थे तो उन्होंने समाज हि‍त में अपने कार्यों से मिसाल पेश करने वाले कई लोगों को मंच पर सम्मानित किया था। इन्‍हीं में एक थे मंगल केवट। मंगल राजघाट पुल पर स्वच्छता और पुल से गंगा में गिर रही गंदगी को बंद करने के लिए प्रयास कर रहे हैं, लेकिन आज सुबह से मंगल इसी पुल पर धरना दे रहे हैं। कारण है वाराणसी के नगर आयुक्त महोदय का एक टका सा जवाब।

हमने राजघाट पुल पर धरना दे रहे मंगल केवट से बात की। मंगल केवट ने बताया कि साल 2014 में जब प्रधानमंत्री ने स्वच्छता की अलख जगाया था तो मैंने पुल को देखा, जिसपर गंदगी का साम्राज्य कायम हो चुका था। मैंने डस्टबीन लगाकर राजघाट पुल की सफाई शुरू की। साथ ही लोगों से गंगा में कूड़ा कचरा और अनुपयोगी हो चुकी पूजन सामग्री न डालने की अपील की थी।

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ये बात प्रधानमंत्री मोदी जी तक पहुंची तो वे बहुत खुश हुए। उन्‍होंने मुझे मंच पर सम्मानित भी किया। मैं आज भी इसकी स्वच्छता के लिए नि‍:स्‍वार्थभाव से लगा हूं। मैं अकेले इस कार्य को प्रति‍दि‍न करता हूं, लेकिन फिर भी कमी रह जाती है। मेरी मांग थी कि नगर निगम वाराणसी इस पुल पर रोज़ सफाई कराए।

मंगल ने बताया कि इस संबंध में जब मैंने 18 अगस्त को मुख्यमंत्री के एक कालिदास मार्ग स्थित घर पर जाकर वहां जन सुनवाई में मुलाकात की तो वहां अधिकारियों ने दो दिन में समस्या के समाधान का आश्वासन दिया गया।

मंगल ने आरोप लगाते हुए कहा कि दो दिन बाद भी जब काम शुरू नही हुआ तो मैंने नगर आयुक्त साहब को जब फ़ोन किया तो उन्होंने कहा कि राजघाट का पुल हमारे कार्यक्षेत्र में नही है। मंगल ने प्रश्‍न कि‍या कि‍ क्या स्वच्छता के लिए भी लकीर खिंची जाएगी या पुलि‍स की तरह सीमा वि‍वाद में उलझना होगा।

वहीं खबर लि‍खे जाने तक जैसे जैसे रात गहरा रही है, केवट मंगल अपनी मांग के साथ राजघाट पुल पर अपनी ट्राली पर धरना दे रहे हैं।

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