वाराणसी। लाल किले की प्राचीर से महिला सशक्तिकरण की बात करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अपने संसदीय क्षेत्र में महिलाओं की हालत बद से बदतर होती जा रही है। वर्षों से अध्यात्म, शिक्षा और  खेल में देश का गौरव बढाने वाले शहर बनारस में महिला अन्तरराष्ट्रीय मुक्केबाज़ अपनी आगामी प्रतिस्पर्धा के लिए भरपेट भोजन भी नहीं कर पा रही है, साथ ही उसे सही डाईट भी नहीं मिल रही है, जबकि सूबे के खेल राज्य मंत्री भी वाराणसी शहर से है ताल्लुक रखते हैं।

इस मुक्केबाज़ को नहीं मिल रही सही डाईट
इसे विडम्बना कहें या लड़की होने का दंश की काशी की रहने वाली एक अन्तरराष्ट्रीय महिला मुक्केबाज़ जिसने आज तक गोल्ड के सिवा कोई अन्य पदक नहीं हासिल किया उसे आज अपनी आगामी प्रतियोगिता के लिए सही डाईट भी मयस्सर नहीं है। पिछले 5 सालों में दीपिका ने एक भी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता नहीं हारी है।

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हर बार मिला है स्वर्ण पदक
दीपिका को अपनी कैटेगरी में हर प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक ही हासिल हुआ है पिछले 5 साल से मुक्केबाजी की अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताएं खेलने वाली दीपिका की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं है और इसके लिए वह सरकार के साथ-साथ कई लोगों के दरवाजे खटखटा चुकी है। बनारस की रहने वाली इस बेटी ने प्रतिभा कूट-कूट कर भरी है पर हर बार उन्हें आर्थिक स्थिति के कारण दूसरों के आगे हाथ फैलाना पड़ता है।

16 नवम्बर को अमेरिका में है प्रतियोगिता
दीपिका तिवारी ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए लगने वाली मैच फीस भी अब देने की स्थिति में उसका परिवार नहीं है फिर भी वह लगातार मेहनत कर रही है और देश को स्वर्ण पदक दिलाकर विश्व में एक नया मुकाम हासिल कर रही है। फिलीपींस में डब्ल्यूबीसी में भारत को पहला स्थान दिलाने में दीपिका की प्रमुख भूमिका रही है और आने वाले 16 नवंबर में अमेरिका के अटलांटा में आयोजित डब्ल्यू आई बी एफ प्रतियोगिता में बनारस की बेटी हिस्सा लेने जा रही है। दीपिका ने बताया कि वह पदक लाने के लिए कड़ी मेहनत कर रही है लेकिन आर्थिक स्थिति कमजोर होने की वजह से सही डाइट तक नहीं मिल पा रही है और इस बात कि अब चिंता सता रही है कि इसी कारण उसका यह सपना अधूरा न रह जाए ।

8 घंटे की कड़ी ट्रेनिंग भी जा रही व्यर्थ
दीपिका ने बताया कि दिन भर में 8 घंटे की कड़ी मेहनत और एक भरपूर डाइट ही अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज को सफलता हासिल करवा सकती है। खुराक सही ना होने की वजह से वह अपनी 8 घंटे की ट्रेनिंग भी पूरी नहीं कर पाती है। घर की स्थिति ऐसी है कि खाना हमेशा चिंता का विषय बन जाता है। इसके साथ ही कई और तरीके की परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है।

कैसे जाएगी अमेरिका
दीपिका ने बताया कि वह पैसों की कमी की वजह से किसी अच्छे कोचिंग सेंटर में ट्रेनिंग नहीं ले पाती है और उनकी पिछले 3 साल की ट्रेनिंग भले ही हो गयी हों पर उसके अलावा काफी चीजों को लेकर दूसरे के आगे हाथ फैलाना पड़ता है पहले ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनका चयन हो जाता है, पर वहां तक पहुंचने के लिए उनके पास पैसों की कमी हो जाती है।

खेल मंत्री ने दिया बस आश्वासन
बात दें की कुछ दिन पहले दीपिका अपने कोच धर्मेन्द्र चौहान के साथ प्रधानमन्त्री के संसदीय के कार्यालय पहुंची थी और खेल मंत्री नीलकंठ तिवारी को अपनी व्यथा सुनाई थी जहाँ से उन्हें मदद का आश्वासन मिला है लेकिन कब यह आश्वासन पूरा होगा यह कोई नहीं जानता।

देखिए वीडियो

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