BHU : कवि केदारनाथ सिंह के ‘साखी’ पुस्तक का विमोचन

वाराणसी। बीएचयू के हिंदी विभाग में सोमवार को कवि केदारनाथ सिंह की स्मृति में ‘केदारनाथ सिंह :स्मृति, संघर्ष और सौन्दर्य’ संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

इस अवसर पर भारतीय साहित्य के महत्वपूर्ण हस्ताक्षर ज्ञानपीठ से सम्मानित गुजराती के साहित्यकार रघुवीर चौधरी ने कहा कि केदारनाथ सिंह भारत के कवि हैं।भारतीय कविता में केदारनाथ सिंह की उपस्थिति ऊष्मापूर्ण आत्यमीयता की उपस्थिति है। बुद्ध और कबीर की परम्परा में हिंसा के विरुद्ध करुणा को प्रस्तावित करने वाला कवि बताया।

वही उद्घाटन वक्तव्य के पहले सदानंद शाही के सम्पादन में प्रकाशित साखी का श्रद्धांजलि केदारनाथ सिंह अंक का विमोचन हुआ, जिसे मंचस्थ विद्वानों ने ऐतिहासिक बताया क्योंकि यह अंक केदारनाथ सिंह को धरती के कवि के रूप में उनकी छवि का मुकम्मल बयान है।

बात को यहीं से आगे बढ़ाते हुए कवि अरुण कमल ने केदार जी को हिन्दी काव्य परम्परा में ऐसा आखिरी बड़ा कवि बताया जिसे न केवल भारतीय और पाश्चात्य काव्य परम्परा का सम्यक ज्ञान था। बल्कि दोनों के बीच सामंजस्य स्थापित करने का विवेक था।

हिन्दुस्तानीअकादमी के अध्यक्ष उदय प्रताप सिंह ने कहा कि केदार जी लोक और मनुष्य में गहरी आस्था के कवि हैं। प्रख्यात आलोचक हरीश त्रिवेदी ने अध्यक्षीय वक्तव्य मे केदारनाथ सिंह को तद्भव और तत्सम के सामंजस्य का अद्भुत कवि बताया।

अतिथियों का स्वागत प्रो रामकली सराफ और धन्यवाद प्रो प्रभाकर सिंह ने किया।

 

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