उसने 16 साल की उम्र में किया था पहला कत्‍ल, अब बना पुलिस का सिरदर्द

क्राइम फाइल्‍स : झुन्‍ना पंडित

श्रीप्रकाश उर्फ झुन्‍ना की तलाश में आसपड़ोस के कई जनपदों में चल रही छापेमारी
करीबियों और रिश्‍तेदारों से हो रही पूछताछ, भूमिगत हुआ परिवार

वाराणसी। कैंट के मड़वा गांव में दिव्‍यांग की हत्‍या के बाद चर्चा में आया श्रीप्रकाश उर्फ झुन्‍ना यूं ही पुलिस के लिए सिरदर्द नहीं बना हुआ है। जरायम की दुनिया में झुन्‍ना की आम शोहरत कम उम्र में सबसे शातिर बदमाश के रूप में है। उसने मामूली झगड़े में पहला कत्‍ल किया था, तब उसकी उम्र 16 साल थी। उसके खिलाफ हत्‍या, हत्‍या का प्रयास, लूट और रंगदारी के लगभग डेढ़ दर्जन मामले दर्ज हैं। अकेले कैंट थाना झुन्‍ना के खिलाफ दो बार गैंगस्‍टर की कार्रवाई भी कर चुका है।

प्रधान के बेटे को मारी थी गोली
झुन्‍ना के खिलाफ साल-2007 में पहला मुकदमा दर्ज हुआ था जब उसने एक व्‍यवसायी से लूट की थी। इसके बाद छोटे-मोटे अपराधों में उसका नाम आता रहा और उसपर गैंगस्‍टर की कार्रवाई हुई। 2010 में आशापुर के प्रधान ज्‍यूत पांडेय के बेटे अभिषेक उर्फ मोनू से मामूली झगड़े के बाद झुन्‍ना ने उसका कत्‍ल कर दिया। अभिषेक उर्फ हनी समेत पूरा गिरोह गिरफ्तार किया गया तो झुन्‍ना नाबालिग निकला। उसकी उम्र 16 साल और कुछ महीने की थी और उसे रामनगर स्थित बाल संप्रेक्षण गृह में रखा गया था।

जेल से चलाता रहा नेटवर्क
हत्‍या का प्रयास और रंगदारी जैसे मामलों में झुन्‍ना कई बार जेल गया। इसके बाद उसे शातिर अजय उर्फ विजय का साथ मिला। झुन्‍ना ने रंगदारी से कमाए पैसों के बल पर अपना नेटवर्क तैयार किया और जेल से ही गिरोह चलाता रहा। उसके गुर्गे जेल से उसकी चिट्ठी डॉक्‍टरों, व्‍यवसायियों और कालोनाइजरों को पहुंचाते थे और तय समय पर रंगदारी की रकम वसूल लेते थे। रंगदारी न देने वालों पर कई बार फायरिंग भी कराई गई। तत्‍कालीन पुलिस अफसरों ने काफी प्रयास किया मगर जेल से रंगदारी के खेल पर रोक नहीं लगा पाए।

कैंट का डबल मर्डर और गिरोह में फूट
कभी साथी रहे झुन्‍ना और धर्मेंद्र उर्फ कल्‍लू पांडेय में कैंट के दोहरे हत्‍याकांड के बाद से अदावत शुरू हो गई थी। कल्‍लू ने लूट के माल के बंटवारे के विवाद में झुन्‍ना के दो साथियों रंजीत उर्फ बाढ़ू और मोनू की गोली मारकर हत्‍या कर दी थी। इसके बाद दौलतपुर में बन रही सड़क में दोनों की लाश को दफन कर दिया था। झुन्‍ना की सूचना पर पुलिस चार महीने बाद दोनों लाशें बरामद कर पाई थी और कल्‍लू समेत गिरोह के आठ सदस्‍यों को गिरफ्तार किया गया था। झुन्‍ना इस समय रंगदारी और लूट के मामले में अपने पूरे परिवार के साथ जेल में बंद था।

सारादह का ट्रिपल मर्डर
मिर्जापुर के अहरौरा में सारादह का जंगल है। यहां सूखानंद आश्रम के पास 12 अगस्‍त 2014 को गिरोह में सुलह के लिए बदमाश इकट्ठा हुए। 50 हजार का इनामी राजेश चौधरी मांडवाली कराने पहुंचा था। मगर झुन्‍ना और उसके साथी अलग तैयारी से गए थे। अमजद उर्फ डॉक्‍टर और रिंकू सिंह के साथ मिलकर झुन्‍ना ने राजेश चौधरी और कल्‍लू पांडेय की गोली मारकर हत्‍या कर दी। उनके तीसरे साथी सूरज को भी मारकर झरने में फेंक दिया, उसकी लाश कई दिनों बाद बरामद हुई थी।

पुलिस से एक कदम आगे
पुलिस से बचने के लिए झुन्‍ना अपने शातिर दिमाग का इस्‍तेमाल करता है। सूत्रों की मानें तो दो दिन पहले मड़वा गांव में दिव्‍यांग दिलीप की हत्‍या के बाद वह बाइक से रिंग रोड तक गया। वहां पहले से स्‍कार्पियो तैयार रखा गया था। झुन्‍ना का एक साथी बाइक लेकर भागा और स्‍कार्पियो से वह जौनपुर की तरफ निकल गया। पुलिस के मुताबिक अब वह जौनपुर, आजमगढ़, इलाहाबाद, सुल्‍तानपुर या आसपास के किसी भी जिले में हो सकता है। फिलहाल उसका सुराग लगाने के लिए करीबियों से पूछताछ चल रही है।

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